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विपक्षी एकता के आगे थर्राई 27 महीने पुरानी इमरान सरकार, निशाने पर सेना और आइएसआइ

इस्‍लामाबाद/ग्‍लासगो। पाकिस्‍तान में व‍िपक्षी एकता के आगे 27 महीने पुरानी इमरान खान सरकार को खतरा उत्‍पन्‍न हो चला है। पाकिस्‍तान के संपूर्ण विपक्ष ने प्रधानमंत्री इमरान सरकार के खिलाफ एक नया मोर्चा खोल दिया है। अगर विपक्ष अपने मूहिम में सफल होता है तो पाकिस्‍तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के करियर पर गंभीर संकट उत्‍पन्‍न हो सकता है। उनकी कुर्सी खतरे में है। पंजाब के गुजरांवाला और सिंध के महानगर कराची में 16 और 18 अक्टूबर को पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) द्वारा आयोजित सार्वजनिक रैलियों ने सरकार के आत्मविश्वास को हिला दिया है। पाकिस्‍तान में ऐसे बहुत कम मौके आए हैं, जब विपक्ष ने अपनी एकता का प्रदर्शन किया हो। हालांकि, पाकिस्‍तान में जब भी विपक्ष की एकता सामने आई है, उसमें आइएसआइ और सेना का हाथ भी सामने आया है।

पीडीएम के गठन पर उठे सवाल

पीडीएम के गठन में आइएसआइ और सेना की भूमिका बताई जा रही है। लोगों का मानना है कि बिना आइएसआइ और सेना की मदद से पीडीएम का गठन असंभव है। यह कयास अनायास नहीं है। इसके पूर्व भी 1988 में जब बेनजीर भुट्टो सत्ता में आई थीं, आइएसआइ प्रमुख हामिद गुल ने एक टेलीविजन साक्षात्कार में स्वीकार किया था कि उन्होंने पीपीपी की लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार के खिलाफ नौ-पार्टी गठबंधन बनाने में मदद की थी।

11 विपक्षी दलों के गठबंधन है पीडीएम

पाकिस्तान में इमरान सरकार के खिलाफ 11 विपक्षी दलों के गठबंधन पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट ने रविवार को कराची के जिन्ना-बाग में अपनी दूसरी बड़ी रैली की। रैली को पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) की उपाध्यक्ष मरियम नवाज, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो-जरदारी, जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने संबोधित किया था। फजलुर रहमान को गठबंधन के पहले चरण के प्रमुख के तौर पर नियुक्त किया गया है। विपक्षी गठबंधन की पहली रैली गुजरांवाला में हुई थी, जिसमें पीएमएल-एन सुप्रीमो नवाज शरीफ ने अपने भाषण में सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा पर चुनाव में हेरफेर करने का आरोप लगाया था। रैली में विपक्षी दलों के नेताओं ने प्रधानमंत्री खान पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने इमरान खान पर अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने का आरोप लगाया।

पाकिस्‍तान में आइएसआइ और सेना की हुकूमत

विपक्ष का दावा है कि पाकिस्‍तान में निर्वाचित सरकार के बजाए आइएसआइ और सेना हुकूमत कर रही है। विपक्ष का आरोप है कि इमरान सरकार हर मोर्चे पर विफल रही है, जिसके चलते प्रधानमंत्री ने सेना के आगे हथियार डाल दिए हैं। देश में सेना ने सत्‍ता पर अप्रत्‍यक्ष रूप से कब्‍जा कर लिया है। सरकार की हर मोर्चे पर विफलता ने सेना को हस्‍तक्षेप का मौका प्रदान किया है।  इसके चलते आइएसआइ और सेना को देश के सियासत में दखल देने का एक बार फ‍िर मौका मिला है  विपक्ष ने एक सुर में इमरान खान को एक कमजोर प्रधानमंत्री करार दिया

अगस्‍त, 2018 में इमरान खान ने ली पीएम पद की शपथ

पाकिस्‍तान में 25 जुलाई, 2018 को हुए आम चुनावों के तीन सप्ताह बाद इमरान ने नए प्रधानमंत्री पद की रूप में शपथ ली थी। 18 अगस्‍त, 2018 को सामान्‍य बहुमत के साथ इमरान खान को नया प्रधानमंत्री चुना गया। 342 सदस्यों वाली पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में 116 सीटों के साथ इमरान खान की पीटीआई सबसे बड़े राजनीतिक दल के रूप में उभरी थी। बाद में 9 निर्दलीय उम्मीदवारों ने खान की पार्टी में शामिल हो गए। इसके अलावा संसद में महिलाओं के लिए आरक्षित 60 सीटों में 28 सीटें, और धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित 10 में से पांच सीटें मिलने के बाद पीटीआई के सदस्यों की संख्या बढ़कर 158 हो गई।

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