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कृषि मंत्री तोमर ने कहा- कृषि कानून समर्थक किसानों की भावनाओं और हितों को समझें आंदोलकारी

नई दिल्ली। कृषि सुधार के लिए संसद से पारित तीनों कृषि कानूनों का समर्थन करने वाले किसानों की संख्या बहुत बड़ी है। इसका हवाला देते हुए कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि आंदोलन करने वाले किसान यूनियन के नेताओं को कानून समर्थकों की भावनाओं का भी ध्यान रखना चाहिए। देश के किसान समुदाय की भावनाओं के मद्देनजर कृषि सुधार के कानून लाए गए हैं।

कृषि मंत्री से मिले कानून समर्थक किसान संगठनों के नेता

कानून समर्थक किसान प्रतिनिधियों से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बात करते हुए तोमर ने विश्वास जताया कि आंदोलनकारी संगठन सभी किसानों के हितों को देखते हुए सरकार के साथ वार्ता कर कोई समाधान जरूर निकालेंगे।

कानून समर्थक किसान संघ ने सरकार को आंदोलनकारी किसान यूनियनों से वार्ता के लिए दिए सुझाव

बुधवार को अखिल भारतीय किसान संघ के अध्यक्ष व पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के पोते संजय नाथ सिंह अपने प्रतिनिधियों के साथ तोमर से मुलाकात करने पहुंचे। उन्होंने कानूनों के समर्थन में एक ज्ञापन कृषि मंत्री को सौंपा। प्रतिनिधियों ने सरकार को आंदोलनकारी किसान यूनियनों से वार्ता के लिए कुछ सुझाव भी दिए। संगठन ने कांट्रैक्ट खेती वाले कानून के अमल में आने वाली गड़बड़ियों पर निगरानी रखने के लिए एक नियामक प्राधिकरण के गठन का सुझाव भी दिया।

तोमर ने कहा- सरकार किसानों के हितों को लेकर प्रतिबद्ध

मुलाकात के बाद तोमर ने कहा कि सरकार किसानों के हितों को लेकर प्रतिबद्ध है। हम कानून समर्थक और विरोधी दोनों पक्ष के किसान संगठनों से बात कर रहे हैं। देश के कोने-कोने से किसान संगठनों के नेता यहां आकर कानूनों का समर्थन कर रहे हैं। पत्र और टेलीफोन पर समर्थन मिलने का सिलसिला जारी है। हम उनका स्वागत करने के साथ धन्यवाद भी दे रहे हैं

कृषि मंत्री ने कहा- कृषि कानून समर्थक किसानों की भावनाओं व हितों को समझें आंदोलकारी

तोमर ने फिर भरोसा जताया कि आंदोलनकारी किसान संगठन कानून समर्थक किसानों की भावनाओं को समझेंगे। किसानों के हितों का ध्यान रखते हुए वार्ता में किसी सर्वसम्मत समाधान पर पहुंचेंगे।

छोटी जोत के किसानों के हित संरक्षण के लिए एफपीओ का होगा गठन

किसान नेताओं से बातचीत में कृषि मंत्री तोमर ने कृषि क्षेत्र के लिए सरकार के प्रयासों का विस्तार से जिक्र किया। खासतौर पर छोटी जोत के किसानों के हित संरक्षण के लिए फार्म प्रोड्यूसर आर्गनाइजेशन (एफपीओ) के गठन करने और कृषि क्षेत्र के बुनियादी ढांचे के लिए एक लाख करोड़ रुपये के प्रावधान के बारे में बताया।

अड़ियल रुख अपनाए आंदोलनकारी किसान नेता सरकार की बात सुनने को तैयार नहीं

उल्लेखनीय है कि आंदोलनकारी किसान संगठनों से सात चरणों की वार्ता हो चुकी है, लेकिन बात नहीं बन पा रही है। किसान संगठन अपने अड़ियल रुख के चलते जिद ठानकर बैठे हैं। वे कुछ सुनने को तैयार ही नहीं हैं। इन संगठनों का सितंबर से ही आंदोलन चल रहा है। सरकार ने कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए कानूनी प्रावधान किए हैं, ताकि किसानों की आमदनी को बढ़ाया जा सके और उनके जीवन स्तर में सुधार हो सके।

किसान संगठनों के साथ आठ जनवरी को होगी आठवें दौर की वार्ता

आंदोलन कर रहे किसान संगठनों को लगता है कि सरकार मौजूदा एमएसपी और मंडी प्रणाली के खिलाफ है। कानूनी प्रावधानों से कारपोरेट सेक्टर को लाभ मिलेगा। किसान संगठनों के साथ अगले दौर की वार्ता आठ जनवरी को होनी है।

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