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विकास दुबे के बाद अब उसके गुर्गों को शरण देने वालों पर शिकंजा, दो गिरफ्तार

कानपुर। कानपुर के चौबेपुर के बिकरू गांव में एक सीओ सहित आठ पुलिसकर्मियों की हत्या का मुख्य आरोपित पांच लाख का इनामी विकास दुबे की शुक्रवार को पुलिस मुठभेड़ में ढेर हो गया। उसके बाद अब उसके गुर्गों को शरण देने वाले पुलिस की रडार पर हैं। कानपुर पुलिस ने शनिवार सुबह विकास दुबे के गुर्गों को शरण देने वाले दो लोगों को गिरफ्तार किया है।

कानपुर की चौबेपुर थाना की फोर्स अब विकास दुबे के काले कारोबार को ध्वस्त करने में लगी है। पुलिस ने आज विकास दुबे के गुर्गों को शरण देने वाले दो लोगों को गिरफ्तार किया है। इनके ऊपर आरोप है कि चौबेपुर थाना क्षेत्र के बिकरू गांव में दो-तीन जुलाई की रात पुलिस बल पर हमले के कई आरोपियों को इन लोगों ने अपने घर में शरण दी। दोनों आरोपी मध्य प्रदेश के ग्वालियर के हैं।

इनके ऊपर विकास दुबे के काले कारोबार को आगे बढ़ाने के साथ उसके गुर्गों को शरण देने का आरोप है। पुलिस ने विकास दुबे के दो सहयोगियों ओम प्रकाश के साथ अनिल पांडेय को गिरफ्तार किया है। कानपुर के चौबेपुर थाना की फोर्स ने इनको ग्वालियर से पकड़ा है। ओम प्रकाश पाण्डेय पुत्र छोटेलाल पाण्डेय तथा अनिल पाण्डेय पुत्र चंद्र प्रकाश पाण्डेय के खिलाफ कानपुर के चौबेपुर थाना में केस दर्ज किया गया है।

एनकाउंटर से पहले विकास ने बताया कि उसने बिकरू कांड के बाद मौके पर मिली पुलिस से लूटी गईं इंसास, एके 47 रायफलें और पिस्टल अपने अन्य साथियों को दे दी थीं। हंसते हुए बोला कि पुलिस बेवजह कुओं का पानी निकालती रही है। उसने बताया कि पहले सोचा था कि हथियार तोड़कर पांडु नदी में डाल दूं, लेकिन बाद में ख्याल बदल दिया। साथियों से कहा कि इसे रखो, बाद में काम आएंगे। अब तक पुलिस लूटे गए हथियार बरामद नहीं कर सकी है। पुलिस यह भी मान रही है कि विकास ने भागते समय कहीं जंगल में हथियार छिपाए और उसकी जानकारी उसने एमपी पुलिस को दी है। बता दें कि लूटी गई दो 9 एमएम पिस्टल और एक ग्लॉक पिस्टल बरामद की जा चुकी है।

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