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उत्तराखंड में बुनकर और हथकरघा को इस बार मिलेगा आर्थिक संबल

देहरादून। कोरोनाकाल में लगभग बंद हो चुके उत्तराखंड के बुनकर और हथकरघा से जुड़े हजारों ग्रामीणों के लिए नया साल नई उम्मीद लेकर आया है। वर्ष 2020 में करीब मार्च महीने से कोरोना संक्रमण के कारण 24 मार्च से लॉकडाउन लग गया था, जिससे प्रदेश के सभी लघु और कुरीर उद्योग बंद हो गए थे। इससे इस कुटीर उद्योगों से जुड़े हजारों ग्रामीण बेरोजगार हो गए थे।

उत्तराखंड के उद्योग निदेशालय में करीब दो हजार कुटीर बुनकर और हथकरघा उद्योग पंजीकृत हैं। इन उद्योगों से 12 हजार के करीब ग्रामीण स्वरोजगार से जुड़े हैं। लकड़ी के सजावटी सामान, चटाई, फर्नीचर, चादरें, ऊनी और खादी विभिन्न प्रकार के पकड़े, धातु के वर्तन को बनाने के अलावा भेड़ की ऊन से तैयार गर्म स्वेटर आदि ग्रामीण क्षेत्रों से कुटीर उद्योगों की श्रेणी में जाते हैं। इन कुटीर उद्योगों से ग्रामीण क्षेत्रों में महिला स्वयं सहायता केंद्र सीधे जुड़े होते हैं। मइ्र महिला स्वयं सहायता केंद्र ग्रामीण खाद्य वस्तु दालें, मिल, मसाले, जटनी, जेम फल के जूस आदि का व्यापार भी करती हैं।

यह सभी स्वरोजगार के धंधे कोरोना संक्रमण के कारण इस बार ठप रहे। अब भी 30 से 40 फीसद तक ही कुटीर उद्योग कार्य कर रहे हैं। यह कुटीर उद्योग ग्रामीणों की जीविका के लिए महत्वपूर्ण हैं। अब नये साल 2021 में कोरोना वैक्सीन आने के कारण उम्मीद जगी है कि मार्च माह तक देश में सभी कारोबार सामान्य हो जाएगा। ऐसे में उत्तराखंड के बुनकर और हथकरघा कुटीर उद्योग भी गति पकड़ लेंगे। प्रदेश उद्योग निदेशक सुधीर नौटियाल ने कहा कि इस साल कुटी उद्योगों के साथ लघु एवं मध्यम उद्योगों में कारोबार गति पकड़ेगा। कोरोनाकाल में उद्योगों का कारोबार प्रभावित रहा है।

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