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अपनों ने ठुकराया तो विदेशियों ने अपनाया, यूपी के बाल गृहों से स्पेशल नीड वाली 17 बेटियां गईं परदेश

लखनऊ। विशेष जरूरत (स्पेशल नीड) वाली बेटियों को अपनों ने भले ही ठुकरा दिया हो लेकिन उन्हें परदेसियों ने अपना बना लिया है। उत्तर प्रदेश के बाल गृहों से गोद ली गईं विशेष जरूरत वाली 19 बेटियों में से 17 विदेश में गोद ली गईं हैं। इनमें सबसे अधिक 12 बेटियां अमेरिका में गोद ली गईं हैं। विशेष जरूरत वाली केवल दो बेटियों को ही भारतीयों ने गोद लिया है।

उत्तर प्रदेश में पांच राजकीय व 21 स्वैच्छिक संगठनों की विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण इकाइयां संचालित हैं। इनमें अनाथ व परित्यक्त बच्चों को रखा जाता है। प्रदेश के सभी 26 बाल गृहों से बच्चों को सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (कारा) से गोद दिया जाता है। गोद देने वाले बच्चों की दो तरह श्रेणियां कारा ने बनाई हैं। इनमें ‘नॉर्मल’ व ‘स्पेशल नीड’ हैं।

स्पेशल नीड श्रेणी में ये बच्चे : स्पेशल नीड यानी विशेष आवश्यकता वाली श्रेणी में शारीरिक, मानसिक व न्यूरोलॉजिकल तीनों तरह की बीमारियों से ग्रसित बच्चे आते हैं। इसमें करीब 70 तरह की बीमारियों को शामिल किया गया है। प्रदेश की दत्तक ग्रहण इकाइयों में पिछले दो वर्षों (जनवरी 2019 से दिसंबर 2020) में 42 विशेष जरूरत वाली बेटियां गोद देने के लिए पंजीकृत हुईं हैं।

दूसरे देश में बच्चों को गोद देने की कानूनी मान्यता : दरअसल, हेग कन्वेंशन के तहत एक देश से दूसरे देश में बच्चों को गोद देने के लिए कानूनी मान्यता दी गई है। इसी के तहत अपने देश से भी बच्चों को विदेशों में गोद दिया जाता है। पिछले दो वर्षों की बात की जाए तो प्रदेश की दत्तक ग्रहण इकाइयों से विदेशों में 56 नॉर्मल व 17 विशेष जरूरत वाली बेटियों को गोद दिया गया। इनमें 2019 में 11 व 2020 में छह बेटियां गोद दी गईं हैं। 2020 ऐसा वर्ष है जिसमें कोरोना संक्रमण के कारण सारी गतिविधियां लंबे समय तक ठप थीं। अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भी लंबे समय तक बंद थीं।

किस देश ने कितनी गोद ली बेटियां : अमेरिका में 12, फिनलैंड में एक, इटली में एक, माल्टा में एक और इंग्लैंड में दो विशेष जरूरत वाली बेटियों को अपनाया गया।

विशेष जरूरत वाले आठ बेटे भी लिए गए गोद : पिछले दो वर्षों में विशेष जरूरत वाले 15 बेटे गोद देने के लिए पंजीकृत हुए। इनमें से नौ बेटों को ही गोद लिया गया। आठ बेटों को विदेशियों ने गोद लिया है। इनमें अकेले अमेरिका में ही पांच बेटे गोद लिए गए हैं। इटली, माल्टा व डेनमार्क में एक-एक बेटा गोद लिया गया है। केवल एक बेटे को अपने देश में गोद लिया गया है।

विदेश में मिल जाती हैं अच्छी चिकित्सीय सुविधाएं : विदेश में विशेष जरूरत वाले बच्चों को इसलिए भी गोद लिया जाता है क्योंकि वहां चिकित्सीय सुविधाएं काफी अच्छी हैं। ऐसे बच्चों को वहां आसानी से इलाज मिल जाता है। सामाजिक सरोकार के तहत भी ऐसे बच्चों को गोद लेकर मां-बाप उनकी सेवा करते हैं। इन बच्चों को इस लायक बनाने की कोशिश होती है कि वे बड़े होकर आत्मनिर्भर हो सकें।

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