Cover

पद्मनाभस्वामी मंदिर प्रबंधन के विवाद पर आज फैसला सुनाएगा सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। देश के सबसे समृद्ध माने जाने वाले तिरुअनंतपुरम स्थित श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के प्रबंधन के विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को फैसला सुनाएगा। इस ऐतिहासिक मंदिर में वित्तीय अनियमितताओं को लेकर पिछले नौ सालों से प्रबंधन और प्रशासन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में यह मामला लंबित है।

भगवान पद्मनाभ (विष्णु) के इस भव्य मंदिर का पुनíनर्माण 18वीं सदी में इसके मौजूदा स्वरूप में त्रावणकोर शाही परिवार ने कराया था। इसी शाही परिवार ने 1947 में भारतीय संघ में विलय से पहले दक्षिणी केरल और उससे लगे तमिलनाडु के कुछ भागों पर शासन किया था। स्वतंत्रता के बाद भी मंदिर का संचालन पूर्ववर्ती राजपरिवार ही नियंत्रित ट्रस्ट करता रहा जिसके कुलदेवता भगवान पद्मनाभ हैं।

जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की पीठ ने पिछले साल 10 अप्रैल को मामले में केरल हाईकोर्ट के 31 जनवरी, 2011 के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रखा था। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मंदिर, उसकी संपत्तियों का प्रबंधन संभालने तथा परिपाटियों के अनुरूप मंदिर का संचालन करने के लिए एक निकाय या ट्रस्ट बनाने के लिहाज से कदम उठाने का निर्देश दिया था। शीर्ष अदालत ने दो मई, 2011 को मंदिर के प्रबंधन और संपत्तियों पर नियंत्रण से संबंधित हाईकोर्ट के निर्देश पर रोक लगा दी थी।

न्यायालय ने यह निर्देश भी दिया था कि मंदिर के खजाने में मूल्यवान वस्तुओं, आभूषणों का भी विस्तृत विवरण तैयार किया जाएगा। शीर्ष अदालत ने आठ जुलाई, 2011 को कहा था कि मंदिर के तहखाने-बी के खुलने की प्रक्रिया पर अगले आदेश तक रोक रहेगी। जुलाई 2017 में न्यायालय ने कहा था कि वह इन दावों का अध्ययन करेगा कि मंदिर के एक तहखाने में रहस्यमयी ऊर्जा वाला अपार खजाना है।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.