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चीन में बने सामान को रोकने के साथ स्वदेशी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की जरूरत : मोहन भागवत

भोपालः चीन में बने सामान को रोकने के साथ-साथ स्वदेशी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया जाए। आम लोगों में चीनी सामान के उपयोग न करने को लेकर जागरूकता लाई जाए। तभी आत्मनिर्भर भारत का हमारा सपना साकार होगा।

यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तीन दिवसीय अनौपचारिक बैठक को संबोधित करते हुए सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कही। भागवत मंगलवार को संघ की अखिल भारतीय टोली (कोर ग्रुप) को संबोधित कर रहे थे। इस बैठक में सरकार्यवाह भय्या जी जोशी, सभी सह सरकार्यवाह और संघ के शीर्षस्थ प्रचारक सहित 20 लोग शामिल हुए हैं। बिना किसी एजेंडे पर आयोजित संघ की इस बैठक में देश के ताजा हालातों सहित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गतिविधियां बढ़ाने के मुद्दे पर तीन दिनों तक चिंतन किया जाएगा।

मंगलवार को पहला दिन था। गौरतलब है कि मार्च में कोरोना और लॉकडाउन के कारण संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक तो हो गई थी, लेकिन प्रतिनिधि सभा की बैठक नहीं हो पाई थी। इसके बाद संघ की यह पहली बैठक है। संघ ने हर वर्ष जुलाई में होने वाली अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक को भी कोरोना के कारण रद कर दिया था। बैठक के पहले दिन संघ नेताओं का सबसे ज्यादा फोकस स्वदेशी को ज्यादा से ज्यादा अपनाने और चीन में बने सामान के बहिष्कार करने पर रहा। संघ नेताओं ने कहा कि लघु, कुटीर और मध्यम उद्योगों को मजबूत करने की दिशा में क्या-क्या कदम उठाए जा सकते हैं, केंद्र सरकार से मिलने वाले पैकेज का लाभ इन उद्योगों को कैसे मिल सकता है, इस बारे में लघु उद्योग भारती और स्वदेशी जागरण मंच जैसे संगठन काम करें। इन उद्योगों की जरूरतों को समझकर उन्हें मदद दिलाएं।

कोरोना के कारण बंद शाखाओं पर भी चर्चा 
सूत्रों के मुताबिक, पिछले साढ़े तीन महीने से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सभी बड़े पदाधिकारी अपने मुख्यालय से पहली बार निकलकर भोपाल की अनौपचारिक बैठक में शामिल हुए हैं। आमतौर पर हर तीन महीने बाद होने वाली अनौपचारिक बैठक में संघ पदाधिकारियों के प्रवास और कामकाज की समीक्षा होती है।

साथ ही अगले तीन महीने के प्रवास और आगे की रणनीति तय होती है। पर इन दिनों कोरोना संकट के कारण लगभग सभी गतिविधियां शिथिल पड़ी हुई हैं। यही वजह है कि संघ की बैठक में मुख्य मुद्दा कोरोना वायरस के साथ संघ कार्य और गतिविधियों को कैसे आगे बढ़ाया जाए, इसके क्या-क्या विकल्प हो सकते हैं, रहा।

ऐसे तमाम विषयों पर लंबी चर्चा हुई। इसके साथ ही अनुषांगिक संगठनों के कामकाज को लेकर भी विचार किया गया। संघ नेताओं ने कोरोना के कारण बंद हुई शाखाओं पर भी चिंता व्यक्त की। स्वयंसेवकों से प्रत्यक्ष संपर्क टूटने के कारण संघ कार्य प्रभावित होने का मुद्दा भी चर्चा में आया।

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