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इमरान-शेख हसीना की फोन वार्ता पर बांग्‍लादेश में सियासत शुरू, भारत की भी नजर

ढाका। पाकिस्तान के प्रधान मंत्री इमरान खान और बांग्लादेशी समकक्ष शेख हसीना के बीच हुई फोन वार्ता पर नई दिल्‍ली की पैनी नजर है। इस वार्ता में दोनों नेताओं ने एक दूसरे के अभिवादन के साथ दोनों देशों में आई बाढ़ और कोरोना महामारी के हालात पर चर्चा की। बातचीत के दौरान पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और सार्क के माध्यम से क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ाने पर भी चर्चा की। वार्ता के दौरान इमरान ने भारत के मुद्दों पर भी अपना रुख बताया और गतिरोधाेंं पर शांतिपूर्ण समाधान की उम्मीद की। अब भारत की नजर बांग्‍लादेश की प्रतिक्रिया पर टिकी है।

बांग्‍लादेश के अगले कदम का इंतजार 

दोनों नेताओं की इस वार्ता के बाद अब यह देखना दिलचस्‍प होगा कि बांग्‍लादेश और पाकिस्‍तान के रिश्‍ते किस करवट बैठता है। बांग्‍लादेश का अगला कदम क्‍या होगा। हालांकि, दोनों देशों के मधुर संबंधों में सबसे बाड़ा रोड़ा इसके अतीत में ही छिपा है। इस बीच बांग्‍लादेश के विदेश मंत्री एके अब्‍दुल मोमिन ने स्‍पष्‍ट किया कि पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान कोरोना महामारी और बाढ़ की स्थिति के बारे वार्ता के लिए कॉल किया था। यह एक सरल शिष्‍टाचार मुलाकात के अलावा कुछ भी नहीं था। उन्‍होंने कहा कि यह बेहतर होगा कि पाकिस्‍तान हमारे साथ संबंध बेहतर कर सकें।

मोमिन ने कहा, बांग्‍लादेश को सब कुछ याद है

विदेश मंत्री मोमिनने कहा कि देश 1971 में हुए मुक्ति संग्राम के दौरान करीब 30 लाख बांग्लादेशियों की दर्दनाक हत्या और सैकड़ों हजारों महिलाओं के साथ बलात्कार को नहीं भूला है। उसे सब कुछ याद है। उन्‍होंने कहा कि पाकिस्तान ने 1971 के लिबरेशन युद्ध के दौरान किए गए नरसंहार के लिए अभी तक माफी नहीं मांगी है। हम हर किसी के साथ दोस्ती बनाए रखना चाहते हैं, लेकिन अगर वे माफी नहीं मांग सकते हैं तो यह कैसे संभव है। इसके अलावा बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति को प्रभावित करने और अशांति फैलाने के लिए गतिविधियों में शामिल होने के लिए पाकिस्तान पर भी आरोप हैं।

खालिद महमूद चौधरी ने भी कहा दो टूक 

जहाजरानी राज्य मंत्री खालिद महमूद चौधरी के हवाले से कहा गया था कि बांग्लादेश और पाकिस्तान दोनों सार्क के प्रमुख देश हैं। इसलिए दो प्रधानमंत्री दक्षिण एशिया के बारे में किसी भी मुद्दे पर बात कर सकते हैं। हालांकि, उन्‍होंने स्‍वीकार किया हमारे बीच अभी भी कुछ अनसुलझे मुद्दे हैं। यदि वे संबंधों को मजबूत करना चाहते हैं, तो उन्हें पहले उन मुद्दों को हल करना होगा। बांग्लादेश ने खूनी युद्ध के माध्यम से स्वतंत्रता प्राप्त की, न कि टेबल चर्चा के माध्यम से।

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