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NDA के प्रमुख घटक दल होने के नाते आईना दिखाना जरूरी : केसी त्यागी

गाजियाबाद। जनता दल यूनाइटेड के प्रवक्ता केसी त्यागी ने विक्रम त्यागी अपहरण कांड को लेकर उत्तर प्रदेश में सत्तासीन योगी आदित्यनाथ सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि भले ही हम एनडीए सरकार के प्रमुख घटक दल हैं, लेकिन प्रदेश में लगातार बिगड़ रही कानून व्यवस्था को लेकर आईना दिखाना बेहद जरूरी है।

मंगलवार को वह राजनगर एक्सटेंशन में केडीपी ग्रैंड सवाना सोसाइटी के बाहर विक्रम त्यागी अपहरण कांड को लेकर चल रहे धरने में पहुंचे थे।  इस दौरान जागरण संवाददाता से बातचीत में उन्होंने कानपुर में हुई संजीत यादव अपहर की घटना जिक्र करते हुए कहा कि परिवार के सदस्य के अपहरण में पुलिस 30 लाख रुपये की फिरौती भी दिलाती है और हत्या भी होती है। जेडीयू नेता केसी त्यागी कहा कि दिल्ली से सटे गाजियाबाद जैसे शहर में अपराध की मानों बाढ़-सी आ गई है। विक्रम त्यागी का अपहरण हुए एक लंबा समय बीत गया, लेकिन उत्तर प्रदेश पुलिस अभी तक उनका सुराग नहीं लगा सकी है। अपराध का आलम यह है कि आए दिन लूट, हत्या, अपहरण के मामले बढ़ रहे हैं। इसका भी अहसास है कि हम भाजपा सरकार के प्रमुख घटक दल हैं, लेकिन बावजूद इसके अपनी जिम्मेदारी का भी अहसास है और प्रदेश में बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर सरकार को आईना दिखाना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि कोरोना काल है और 100 से 200 कदम पर पुलिस चेकिंग है और गाजियाबाद से मुजफ्फरनगर के खतौली के बीच घटना अपहरण की यह वारदात घटित हुई है। यह प्रदेश सरकार की व्यवस्था पर भी सवाल है। हमारी मांग के बाद एसटीएफ को उनको तलाशने की जिम्मेदारी दी गई है। असल में सरकार को अपराधियों को संदेश देने की जरूरत है, ताकि कभी किसी मां, भाई, बहन या पत्नी को यह चिंता न रहे कि जो बाहर रोजी-रोटी, पढ़ाई के लिए निकला है वापस आएगा कि नहीं।

जानें क्या है विक्रम त्यागी का अपहरण केस

राजनगर एक्सटेंशन की केडीपी ग्रैंड सवाना सोसायटी में पत्नी निधि, बेटा व बेटी के साथ रहने वाले विक्रम जीडीए के ठेकेदार संजय त्यागी के भतीजे हैं और चाचा व तीन चचेरे भाइयों के साथ कंस्ट्रक्शन कंपनी चलाते हैं। 26 जून को पटेलनगर स्थित कार्यालय से घर लौटते समय उनका अपहरण कर लिया गया था। चचेरे भाई अक्षय त्यागी ने थाना सिहानी गेट में उनके अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मेरठ-मुजफ्फरनगर के बॉर्डर पर खतौली में भंगेला चेक पोस्ट पर 26 जून की आधी रात के बाद एक बजे पुलिस ने विक्रम की कार को रोका था, लेकिन कार में वह नहीं थे। कार में सवार दो लोग खुद को दिल्ली पुलिस से बता बैरीकेड गिराकर भाग गए थे। 13 घंटे बाद कार तितावी से लावारिस हालत में मिली थी, इसकी सीट पर पुलिस को खून मिला था। इसके बाद पुलिस ने खून के सैंपल को माता-पिता के खून के सैंपल के साथ डीएनए टेस्ट के लिए भेजा था। टेस्ट की रिपोर्ट में पुष्टि हो गई थी कि गाड़ी में मिला खून विक्रम त्यागी का ही था।

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