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दिग्विजय को सताई लोकतंत्र की चिंता, राष्ट्रपति को पत्र लिख की दलबदल कानून में संशोधन की मांग

भोपाल: मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राज्य में हो रही दल बदल को लेकर महामहिम राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद पत्र लिखा है। उन्होंने राज्य की वर्तमान स्थिति का बयान करते हुए भारतीय लोकतंत्र की रक्षा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाकर दलबदल विरोधी क़ानून में परिवर्तन के लिए अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि समूचे देश में सत्ता के लोभी जन प्रतिनिधियों द्वारा निजी स्वार्थ के लिए दल बदलकर लोकतंत्र को कुचलने का काम किया जा रहा है। हर हाल में सत्ता पाने के लिए किये जा रहे दल बदल ने भारतीय लोकतंत्र को दाग दार बना दिया है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी लोकतांत्रिक परम्पराओं का एक वैभवशाली इतिहास रहा है। भारतीय राजनीति के शीर्ष पुरुष के रूप में पं. जवाहर लाल नेहरु, सरदार वल्लभ भाई पटेल, भारतीय जन संघ के पं. दीनदयाल उपाध्याय, डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पं. अटल बिहारी वाजपेयी, कम्युनिस्ट पार्टी के ईएमएस नम्बुरिपाद, ज्योति बसु और अकाली दल के वयोवृद्ध नेता प्रकाश सिंह बादल हमेशा सिद्धांत परक राजनीति के पक्षधर रहे।

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दिग्विजय ने राष्ट्रपति महोदय को लिखे पत्र में कहा है कि दलिय निष्ठा लोकतंत्र की स्वस्थ परंपरा का हिस्सा रही है। अभी कुछ सालों से राजनीतिक शुचिता खंड-खंड हो रही है। धन व कुर्सी के प्रलोभन में आकर विधायक-सांसद जिस तरह इस्तीफा देकर या दल के टुकड़े करते हुए दलबदल कर रहे हैं। यह स्वस्थ लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ है। लोकतंत्र में जिस जनता के सर्वोच्च होने की दुहाई दी जाती है, दलबदल से सबसे ज्यादा कष्ट उसी जनता को हो रहा है। जिस जनप्रतिनिधि को जनता जनार्दन विधानसभा या लोकसभा भेज रही है वह निहित स्वार्थों की पूर्ती के लिए दल बदलकर जनता के मत का निरादर कर रहा है।
उन्होंने कहा कि राजनैतिक स्वार्थों और सत्ता की भूख से ऊपर उठकर आज इस मामले में विचार किये जाने की ज़रूरत है। मध्यप्रदेश, कर्नाटक, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश और गोवा दलबदल की आंच से झुलसने वाले राज्य हैं जो हमारे सामने दलबदल मामले के सबसे ज्वलंत उदाहरण हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने महामहिम राष्ट्रपति से अनुरोध किया है कि भारतीय लोकतंत्र को “दलबदल के दलदल” से बचाए जाने की महती आवश्यकता है। दलबदल हमारी संवैधानिक परंपराओं पर कुठाराघात है। पूर्व में 1985 और 2003 में हुए संविधान संशोधन अब अप्रासंगिक हो गए हैं। उन्होंने महामहिम को लिखे पत्र के साथ दलबदल विषय पर उनके द्वारा लिखा गया लेख भी प्रेषित किया है।

सिंह ने कहा कि सत्तर वर्षों में समृद्ध हुई भारतीय लोकतांत्रिक परंपराओं को जीवंत रखने के लिए दल बदल के मामलों में सख्त क़ानून बनाया जाकर ऐसे दलबदलू जन प्रतिनिधियों को छह साल के लिए किसी भी तरह के चुनाव लड़ने में रोक लगाना चाहिए। तभी इस देश का लोकतंत्र दागदार हो रहे दौर से बाहर निकलकर वैभवशाली और गौरवशाली संसदीय व्यवस्था का रूप ले सकेगा। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रपति से गुहार लगाते हुए लिखा कि भारतीय लोकतंत्र की रक्षा के लिए दलबदल विरोधी क़ानून में परिवर्तन के लिए कृपा पूर्वक सर्वदलीय बैठक बुलाने की पहल की जानी चाहिए। उन्होंने देश में समग्र विचार-विमर्श, चर्चा-परिचर्चा एवं आम सहमती बनाई जाकर संविधान में संशोधन किये जाने की बात कही।

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