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उत्‍तर कोरिया में महिलाओं को हिरासत में सहना पड़ता है क्‍या कुछ, OHCHR की रिपोर्ट में हुआ खुलासा

संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) की एक रिपोर्ट में डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया (उत्तर कोरिया) छोड़कर जाने वाली और फिर देश को लौटने के लिये मजबूर की गईं महिलाओं की रोंगटे खड़े देने वाली जानकारी उजागर की है। इस रिपोर्ट में उन महिलाओं के बारे में जानकारी दी गई है जिन्हें वापस लौटने पर यातनाएं दी गईं और उनके साथ शारीरिक तौर पर काफी बुरा बर्ताव किया गया। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के मुताबिक, उत्‍तर कोरिया ने कई तरह से इनके साथ मानवाधिकारों का उल्लंघन किया है।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की इस रिपोर्ट में करीब सौ महिलाओं के अनुभवों को शामिल किया गया है। इनका कहना है कि वर्ष 2009 से 2019 के बीच उन्‍हें शारीरिक और मानसिक हिंसा झेलनी पड़ी और उन्‍हें व्यक्तिगत या सामूहिक रूप से दंडित किया गया। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि य‍े महिलाएं आखिरकार वहां से भागने में सफल हुईं और उनकी कहानी संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार की रिपोर्ट के जरिए सामने आ सकी। यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट के मुताबिक, अपना देश छोड़कर भागने वाली इन महिलाओं की व्यथा को सुनना ह्रदय विदारक है।

उनके मुताबिक, ये महिलाएं अक्सर शोषण और तस्करी का शिकार होती रही हैं। इन्‍हें हिरासत में लेने की बजाए इनका ख्‍याल रखने की जरूरत है। उन्‍होंने कहा कि इन्‍हें हिरासत में लेकर उनके मानवाधिकारों का और ज्‍यादा उल्लंघन करने से बचना चाहिए। इन महिलाओं को न्याय पाने, सच जानने और मुआवजा पाने का अधिकार है। यूएन एजेंसी की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्तर कोरिया में देश के नागरिकों द्वारा विदेश यात्रा पर लगभग पूरी तरह पाबंदी है। इसके बावजूद नए जीवन की तलाश में महिलाएं अक्सर जोखिम उठाकर दूसरे देशों की यात्राएं करने के लिये मजबूर होती हैं। इसी वजह से ये महिलाएं अक्‍सर मानव तस्‍करों के हाथों में लग जाती हैं जो उन्‍हें ऐसे नर्क में धकेल देते हैं जहां पर इनका जीवन दर्द भरी दास्‍तान बन जाता है।

इसके बावजूद जो भी महिला अपने देश वापस लौट आती है उसको हिरासत में ले लिया जाता है और अक्सर बिना किसी अदालती कार्रवाई के और अंतरराष्‍ट्रीय मानकों का पालन किए बिना ही सजा सुना दी जाती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि स्वदेश वापिस लौटने वालों को अक्सर देशद्रोहियों के रूप में देखा जाता है। इसमें भी दक्षिण कोरिया जाने या ईसाई समूहों के साथ संपर्क साधने वाली महिलाओं को तो और बुरा वक्‍त झेलना पड़ता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्हें दंडित करते समय मानवाधिकारों का उल्लंघन किया जाता है

इस रिपोर्ट में उत्तर कोरिया छोड़कर चीन भागने वाली एक महिला की कहानी को भी बयां किया गया है। इसमें महिला ने बताया कि शुरुआती जांच के दौरान पुलिस अधिकारी ने उसके साथ मारपीट की और बेहद बुरा बर्ताव किया गया। उसने बताया कि चीन में रहने के दौरान यदि किसी ने दक्षिण कोरियाई चर्च से संपर्क साधा तो समझिए पकड़े जाने पर उसकी मौत तय है। इस महिला का कहना था कि उसने कई सारी जानकारियां छिपाईं लेकिन इसकी उन्‍हें बड़ी कीमत भी चुकानी पड़ी। उन्‍हें इतना पीटा गया कि उसकी पसलियां टूट गईं। रिपोर्ट में कहा गया है कि महिलाओं को बेहद गंदी जगहों पर रखा जाता है जहां पुरुष सुरक्षागार्ड उनकी निगरानी करते थे।

हिरासत में ली गई महिलाएं जेल में दिन के उजाले से लेकर ताजी हवा और भरपेट भोजन से भी दूर रहती थीं। साफ-सफाई तो बहुत दूर की बात है उनकी खास दिनों की जरूरतों का भी ध्‍यान नहीं रखा जाता था। एक महिला ने यूएन मानवाधिकार कर्मचारियों को बताया कि उसके जेल में रहने के दौरान पांच से छह लोगों की मौत हो गई थी। इनमें से अधिकतर की मौत कुपोषण के कारण हुई थी। महिलाओं को हिरासत में नियमित रूप से पीटा जाता है और अन्य यातनाएं दी जाती थीं। महिला कैदियों की तलाशी लेते समय उनकी निजता का ध्‍यान भी नहीं रखा जाता था। उन्‍हें अक्‍सर निर्वस्त्र कर तलाशी ली जाती थी। कई महिलाओं के साथ सुरक्षाकर्मियों ने जबरदस्‍ती तक की। इसके बाद कई महिलाओं का गर्भपात भी कराया गया। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि दर्ज मामले स्पष्ट रूप से अंतरराष्‍ट्रीय मानवाधिकार कानून के तहत उत्तर कोरिया के तय दायित्वों का उल्लंघन है।

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