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Samsung, Apple के वेंडर्स सहित 22 कंपनियां करेंगी 11.5 लाख करोड़ का निवेश, 12 लाख लोगों को मिलेगा रोजगार

नई दिल्ली। इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआइ) के तहत भारत में निवेश के लिए 22 कंपनियों ने अपनी दिलचस्पी दिखाई है। इनमें कई विदेशी कंपनियां शामिल हैं, लेकिन भारत के मोबाइल फोन बाजार में 70 फीसद की हिस्सेदारी रखने वाली चीन की चार कंपनियों ने इस स्कीम से खुद को दूर रखा है। इनमें श्याओमी, ओप्पो, वीवो और रियलमी शामिल हैं। आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बताया कि अगले पांच सालों में इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में 11.5 लाख करोड़ रुपए का निवेश होगा। इस निवेश से 3 लाख प्रत्यक्ष रोजगार तो 9 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार निकलेंगे। इन कंपनियों के उत्पादन शुरू होने पर 7 लाख करोड़ रुपए के निर्यात किए जाएंगे। स्कीम के तहत बनने वाले 60 फीसद मोबाइल फोन के निर्यात किए जाएंगे।

अप्रैल में आईटी व इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्रालय ने पीएलआइ स्कीम की घोषणा की थी। इस स्कीम के तहत भारत में उत्पादन शुरू करने के लिए 31 जुलाई तक आवेदन करना था। पीएलआइ स्कीम मोबाइल फोन एवं इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट के निर्माण के लिए है। मंत्रालय ने भारत में मोबाइल फोन कंपनियों के निर्माण क्षेत्र में पांच विदेशी कंपनियां तो पांच देशी कंपनियों को चैंपियन बनाने का ऐलान किया था। प्रसाद ने बताया कि पीएलआई स्कीम के तहत विदेशी कंपनियां 15,000 रुपए से अधिक कीमत वाले फोन का निर्माण करेंगी। उन्होंने बताया कि पीएलआई स्कीम के तहत सैमसंग, फॉक्सकॉन हॉनहॉय, राइजिंग स्टार, विस्ट्रॉन और पेगाट्रॉन जैसी विदेशी कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई है। इनमें से तीन फॉक्सकॉन हॉनहॉय, विस्ट्रॉन और पेगाट्रॉन एप्पल आईफोन के लिए ठेके पर मैन्यूफैक्चरिंग का काम करती है।

मोबाइल फोन निर्माण के लिए दिलचस्पी दिखाने वाली भारतीय कंपनियों में लावा, डिक्सन टेक्नोलॉजी, माइक्रोमैक्स, पैडगेट इलेक्ट्रॉनिक्स, सोजो मैन्यूफैक्चरिंग सर्विसेज और ऑप्टिमस इलेक्ट्रॉनिक्स शामिल हैं। इलेक्टॉनिक्स कंपोनेंट बनाने के लिए आवेदन करने वाली 10 कंपनियों में एटीएंडएस, एसेंट सर्किट्स, विजकॉन, विटेस्को, नियोलिंक, वाल्सिन, सहस्त्रा जैसी नामी कंपनियां शामिल हैं।

प्रसाद ने बताया कि पीएलआइ स्कीम के तहत मोबाइल फोन कंपनियों के आने से अभी देश में जो वैल्यू एडीशन का काम होता है, वह 15-20 फीसद से बढ़कर 35-40 फीसद हो जाएगा। चीन की कंपनियों द्वारा पीएलआइ स्कीम के तहत आवेदन नहीं करने के बारे में पूछे जाने पर प्रसाद ने कहा कि सरकार किसी भी देश के खिलाफ नहीं है, लेकिन देश की सुरक्षा भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि जिन कंपनियों ने आवेदन किए, उन्हें स्कीम का लाभ दिया जा रहा है। लेकिन आवेदन के लिए पूंजी निवेश और सुरक्षा दोनों शर्तों का पालन महत्वपूर्ण हैं।

प्रसाद ने यह भी कहा कि पहले पांच घरेलू कंपनियों को चैंपियन बनाने का काम किया जाएगा। पीएलआइ स्कीम पांच साल के लिए हैं। इस स्कीम के तहत सरकार 41,000 करोड़ रुपए के इंसेंटिव देगी। भारत मोबाइल फोन निर्माण में विश्व में दूसरे स्थान पर है। सरकार का लक्ष्य पहला स्थान हासिल करना है।

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