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कांग्रेस के लिए आसान नहीं फेसबुक विवाद से पीछा छुड़ाना, सोशल मीडिया में हैं पार्टियों के कई समर्थक

नई दिल्ली। फेसबुक को लेकर उठे विवाद के बीच कांग्रेस और विपक्ष की ओर से संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की जांच से लेकर संसदीय समिति में पूछताछ की मांग तो की जा रही है, लेकिन यह बहुत आसान नहीं होगा।

फेसबुक समेत सोशल मीडिया में हैं विभिन्न पार्टियों के कई समर्थक

दरअसल फेसबुक समेत सोशल मीडिया में न सिर्फ अलग-अलग दलों के विचारों के समर्थकों की खासी संख्या हो सकती है बल्कि कई ऐसे भी हैं जो सीधे तौर पर किसी पार्टी से संबंध रखते हैं या राजनीतिक नेताओं की टीम में काम करते रहे हैं। यानी ऐसी कोई जांच या पूछताछ होती है तो भाजपा, कांग्रेस, वाम, तृणमूल जैसे दलों को भी जवाब देना होगा। वहीं, यह भी तय है कि कांग्रेस नेताओं के भाषण और दिल्ली दंगों के तार जोड़ने की भी कोशिश होगी।

भाजपा ने कहा- कांग्रेस नेता मनीष तिवारी, अजीत मोहन समेत कई लोग फेसबुक से जुड़े हैं

दो दिन पहले वाल स्ट्रीट जर्नल के एक आर्टिकल में फेसबुक पर भाजपा के प्रति नरम होने का आरोप लगाया था। फेसबुक इंडिया की पब्लिक पॉलिसी डायरेक्टर आंखी दास की बहन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की रश्मि दास को उदाहरण और कारण के रूप में पेश कर दिया गया। तत्काल भाजपा की ओर से भी यह साबित करने की कोशिश हुई कि कांग्रेस नेता मनीष तिवारी और फेसबुक इंडिया के मुखिया अजीत मोहन समेत ऐसे कई लोग हैं जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से फेसबुक से जुड़े हैं।

भाजपा का आरोप- अजीत मोहन संप्रग काल में योजना आयोग में थे

भाजपा सोशल मीडिया के प्रभारी अमित मालवीय ने सीधा-सीधा आरोप जड़ा कि मनीष तिवारी अटलांटिक काउंसिल में सीनियर फैलो नियुक्त किए गए थे। उसी अटलांटिक काउंसिल को फेसबुक ने अपने प्लेटफॉर्म से राजनीतिक प्रोपेगेंडा हटाने के लिए आउटसोर्स किया है। अजीत मोहन संप्रग काल में योजना आयोग में काम करते थे।

भाजपा ने कहा- फेसबुक से जुड़ी विजयामूर्ति अमेठी में राहुल के लिए काम कर रही थीं 

कांग्रेस के रणनीतिकार और सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल के साथ काम करने वाले सिद्धार्थ मजूमदार फेसबुक में पब्लिक पॉलिसी टीम का हिस्सा बन गए। फेसबुक में काम करते रहे मनीष खंडूरी को कांग्रेस ने 2019 में लोकसभा का टिकट दिया था। फेसबुक से जुड़ी विजयामूर्ति अमेठी में राहुल के लिए काम कर रही थीं तो कविता केके फेसबुक में आने से पहले तृणमूल नेता डेरेक ओब्रायन के लिए काम करती थीं।

यदि विपक्षी दलों ने फेसबुक मामले को मुद्दा बनाया तो संसद सत्र की बैठक हंगामेदार होगी

स्पष्ट है कि अगर आगामी संसद सत्र के दौरान विपक्षी दलों ने फेसबुक मामले को मुद्दा बनाने की कोशिश की या संसदीय समिति में बात पहुंची तो बैठकें हंगामेदार होंगी। हेट स्पीच के मामले में भाजपा नेताओं को दोषी ठहराया जाएगा तो भाजपा की ओर से सीधे सोनिया गांधी को घसीटने की कोशिश होगी।

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