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विधानसभा अध्यक्ष पद पर ब्राह्मण नेताओं की दावेदारी के साथ उपाध्यक्ष पद भी होगा भाजपा का कब्जा

भोपाल: मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सहित उपाध्यक्ष पद भाजपा के पास जाएगा। मध्यप्रदेश में नया विधानसभा अध्यक्ष कौन होगा? यह सवाल विधानसभा के नए सत्र की अधिसूचना जारी होते ही चर्चा में आ गया है। इस पद के जरिए कांग्रेस और भाजपा के बीच शक्ति परीक्षण होगा? लेकिन माना जा रहा है की संख्या बल देखते हुए कांग्रेस की ओर से उम्मीदवार उतारे जाने को लेकर असमंजस है। दरअसल अभी विधानसभा के अध्यक्ष प्रोटेम स्पीकर भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा हैं, जगदीश देवड़ा ने मंत्री बनने के बाद यह पद छोड़ा था। 3 दिन के सत्र में विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव कराया जाना है माना जा रहा है कि भाजपा यह दोनों पद अपने खास रखेगी।

मध्य प्रदेश में पहले उपाध्यक्ष का पद सत्ताधारी दल प्रतिपक्ष को देता था। लेकिन कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने ऐसा नहीं किया था। दोनों पद अपने पास रखे थे। दोनों दलों के बीच राजनीतिक जंग बहुत तीखी है, लिहाजा भाजपा भी इस परंपरा को आगे बढ़ाने के मूड में नहीं है। दोनों पदों के लिए भाजपा के पास पर्याप्त बहुमत भी है। हालांकि पूर्ववर्ती कमलनाथ सरकार के समय भाजपा ने जिस तरह दोनों पदों के लिए चुनाव की स्थितियां बनाई थीं उसी के मद्देनजर अब कांग्रेस रणनीति बनाने में जुट गई है।

क्या कहती है दलों की परिस्थितियां?
18 माह पहले की और आज की परिस्थितियां और संख्या बल में बदलाव हो गया है, फिर भी कांग्रेस की नजर राज्यसभा चुनाव में भाजपा की तरफ से हुई क्रॉस वोटिंग पर हो सकती है। जिसका वह उपचुनाव के दौरान असंतोष के रूप में फायदा लेने की उम्मीद कर सकती है। विधानसभा के विशेष सत्र में शासकीय कामकाज के विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव ही होगा। प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा चुनाव संपन्न कराएंगे। विधानसभा में विधायकों की संख्या 203 है। जिसमें से कांग्रेस विधायकों की संख्या 89 है भाजपा के 107 विधायक हैं कांग्रेसी सूत्र की मानें तो विधानसभा के भीतर भाजपा को वाकओवर देने की वजह चुनौती देने पर विचार हो रहा है। इसकी वजह यह है 2018 में नाथ सरकार को भाजपा ने भी अपना प्रत्याशी खड़ा कर चुनौती दी थी। हालांकि कांग्रेस के ही अध्यक्ष, उपाध्यक्ष चुने गए थे। भाजपा के अध्यक्ष के लिए कई दावेदार हैं। इसमें पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीताशरण शर्मा विधानसभा के वरिष्ठ विधायक केदार शुक्ला, राजेन्द्र शुक्ला, गिरीश गौतम, नागेंद्र सिंह नागौद, यशपाल सिंह सिसोदिया और अजय विश्नोई के नाम सामने आ रहे हैं सभी इस बार मंत्री बनने से वंचित रहे हैं। वही विंध्यप्रदेश और महाकौशल क्षेत्र की जनता भी उम्मीद कर रही है उनके क्षेत्र से अध्यक्ष हो। डॉ शर्मा का पिछला कार्यकाल शिवराज सरकार के लिए बहुत अच्छा और अनुकूल था। वही नागेंद्र सिंह नागौद, केदार सिंह अजय विश्नोई, राजेन्द्र शुक्ला, गिरीश गौतम वरिष्ठता के हिसाब से प्रबल दावेदारी कर सकते हैं हालांकि बिश्नोई को बीते 2 महीने में कई बार बगावती तेवरों में देखा गया है। प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा भी एक दावेदार के रूप में है माना जा रहा है अध्यक्ष पद पर ब्राह्मण नेताओं की दावेदारी ज्यादा मजबूत है। भाजपा हाईकमान इस संबंध में अंतिम फैसला लेगा।

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