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किशोरों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने के लिए करें थोड़ा अतिरिक्त प्रयास, पढ़े एक्सपर्ट की राय

नई दिल्ली। कोरोना संक्रमण काल में टीनएजर्स का घर में रहकर ऑनलाइन पढ़ाई करना और संक्रमण से जुड़े समाचारों के बारे में जानना आदि ने उनकी जिज्ञासाओं को और बढ़ा दिया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थानों के अनुसार, 13 से 18 वर्ष की उम्र के तीन में से एक किशोर या किशोरी में अधिक जिज्ञासा के साथ ही बेचैनी और तनाव बढ़ रहा है।

हालांकि टीनएजर्स में यही बेचैनी उन्हें अपनी बेस्ट परफॉरमेंस देने के लिए प्रोत्साहित करती है। यह उन्हें हर तरह की चुनौतीपूर्ण स्थिति के लिए तैयार करने में मदद करती है, लेकिन अगर इस तरह की बेचैनी वाली स्थिति से सावधानीपूर्वक न निपटा जाए तो यह डिप्रेशन और आत्महत्या जैसी गंभीर समस्या को जन्म देती है। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों की जिज्ञासा और उनके तनाव को समझने के साथ ही उनकी भावनाओं के साझेदार बनें। जानें क्‍या कहती है पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. पूजा ग्रोवर

धीरे-धीरे क्षमता बढ़ाइए: बड़े होते बच्चों को समझाएं कि कुछ भी करने से पहले छोटे-छोटे लक्ष्य तय कर उन्हें पूरा करना चाहिए, इससे मुश्किल हालात में भी काम करने का विश्वास बढ़ता है। जब आप मुश्किल हालात में लगातार काम करते हैं तो आपका शरीर और मस्तिष्क उसके अनुसार ढल जाता है। उन्हें बताएं कि किसी काम को करने की क्षमता धीरे-धीरे विकसित करें, लेकिन क्षमता बढ़ाने के लिए खुद को किसी मुश्किल में डालने की कोशिश न करें।

मन की बात जरूर सुनें: अगर किशोर कोई ऐसा काम करने जा रहे हैं, जिसमें वे नर्वस हो रहे हैं तो उन्हें अपना मनपसंद काम करके रिलैक्स होने की सलाह दें। किसी परीक्षा, प्रेजेंटेशन और महत्वपूर्ण कार्य से पहले इस तरह की स्थिति का आना स्वाभाविक है। ऐसे समय में दोस्तों से बात करना, कोई मनपसंद कॉमेडी फिल्म या सीरियल देखना और म्यूजिक सुनकर बेचैनी को दूर किया जा सकता है। योग, डांस और दोस्तों के साथ चहलकदमी से भी इस तरह की बेचैनी को कम किया जा सकता है। इससे उनका मन उन चीजों की ओर से हटेगा, जिसकी उन्हें चिंता हो रही है। लॉकडाउन के वक्त से आप बच्चों के साथ ज्यादा वक्त बिता रहे हैं। ऐसे में कोशिश करें कि आप उनके साथ ऐसा कनेक्शन बनाएं ताकि उन्हें अपनी चिंताएं साझा करने में कोई झिझक महसूस न हो।

दूसरों से पहले खुद को जानिए: माता-पिता बच्चों को यह समझाएं कि वे आत्म अवलोकन करें। अपनी ताकत और कमजोरी लिखें। अपने मजबूत पक्षों की जानकारी होने से न केवल उनका आत्मविश्वास बढे़गा साथ ही किसी भी काम को करने से पहले उन्हें अपनी कमजोरियों पर काम करके उनसे बाहर निकलने का रास्ता भी मिलेगा। मानसिक रूप से एक संतुलित जीवन जीने की सलाह देने के साथ ही उनकी दिनचर्या को भी दुरुस्त करने के लिए प्रेरित करें। व्यायाम और अच्छी नींद का महत्व समझाएं। इसी उम्र में बच्चे दुव्र्यसनों की चपेट में आ जाते हैं। उन्हें इनके नुकसान के बारे में बताएं।

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