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राज्यसभा में कई विधेयक पारित, लोकसभा में विभिन्न मुद्दों पर विपक्ष का स्थगन प्रस्ताव

नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र जारी है। राज्यसभा में सांसदों के निलंबन वापसी की मांग के बीच कई विधेयक पारित किए गए हैं। इनमें कंपनीज संशोधन विधेयक 2020,  बैंकिंग रेगुलेशन संशोधन विधेयक 2020 नेशनल फॉरेंसिक साइंंसेज यूनिवर्सिटी विधेयक 2020 समेत अनेक विधेयकों को ध्वनिमत से पारित किया गया है।  राज्यसभा में Essential Commodities (संशोधन) विधेयक 2020 भी पारित कर दिया गया। इस संशोधित विधेयक के तहत अब आवश्यक कमोडिटीज के अंतर्गत अनाज, दालें, तेलहन, प्याज और आलू नहीं आएगा। 15 सितंबर को इस विधेयक पर लोकभा ने मंजूरी दी थी और आज राज्यसभा में यह ध्वनि मत से पारित हो गया।

राज्यसभा में विदेश राज्यमंत्री वी मुरलीधरन ने कहा, ‘भारत सरकार ने 4 मार्च 2020 से भारत के 21 एयरपोर्ट पर आने वाले सभी अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की यूनविर्सल स्क्रीनिंग को अनिवार्य कर दिया।’ उन्होंने कहा, ’24-25 फरवरी को अमेरिका के राष्ट्रपति के दौरे के समय विदेशों से आने वालों के लिए कोविड-19 टेस्ट अनिवार्य नहीं था। 11 मार्च को इस बीमारी को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने महामारी का दर्जा दिया।’ राज्यसभा में निलंबित सांसदों को वापस बुलाए जाने की जोरदार मांग की जा रही है जिसपर संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि यदि ये अपने किए पर खेद व्यक्त करते हैं तो इन्हें वापस बुलाया जा सकता है।

लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव

 दूसरी ओर कांग्रेस ने सत्र की शुरुआत से पहले पार्टी लोकसभा सांसदों की बैठक बुलाई है। कृषि क्षेत्र में सरकार की नीतियों के खिलाफ किसानों के प्रदर्शन पर लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत राय ने स्थगन प्रस्ताव दिया है। इसके अलावा द्रमुक सांसद ए राजा, कांग्रेस सांसद एमके राघवन ने विभिन्न विधेयकों पर चर्चा की मांग को लेकर लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव दिया है। विपक्षी नेताओं ने राज्यसभा से वॉक-आउट किया और संसद परिसर में गांधी प्रतिमा के सामने 8 सांसदों के निलंबन को रद करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया।

 निलंबन के साथ कृषि विधेयक भी हो वापस: कांग्रेस सांसद

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद सैयद नासिर हुसैन ने कहा, ‘सभी विपक्षी पार्टियां बचे सत्र का बहिष्कार करती हैं उन्होंने धरना पर बैठे सांसदों से इसे खत्म करने की अपील की और बचे सत्र के बहिष्कार में साथ दें।’ उन्होंने आगे कहा, ‘हम केवल निलंबन वापसी ही नहीं बल्कि कृषि विधेयक की भी वापसी चाहते हैं ताकि इस पर उचित तौर पर वोटिंग कराई जाए। लेकिन इस तरह का कुछ नहीं होने जा रहा क्योंकि सभापति किसी की भी सुनने को सहमत नहीं हैं।’

उन्होंने आगे बताया, ‘हमने राज्यसभा में कांग्रेस पार्टी की तरफ से तीन महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। पहली मांग है कि सरकार एक नया विधेयक लाए जिसमें सुनिश्चित हो कि कोई भी प्राइवेट कंपनी MSP के नीचे किसानों से कोई उपज नहीं खरीद सकती हैं। हमारी दूसरी मांग है कि स्वामीनाथन फार्मूला के तहत MSP देश में तय हो। हमारी तीसरी मांग है कि भारत सरकार राज्य सरकार या फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यह सुनिश्चित करें कि किसानों से निर्धारित MSP की रेट पर ही है उनकी उपज खरीदी जाए। जब तक यह तीनों मांगें नहीं मानी जातीं हम सदन की कार्यवाही का बहिष्कार करेंगे।’ उन्होंने यह भी कहा कि चौथी महत्वपूर्ण बात जो मैंने कही है राज्यसभा में वह हमने रिक्वेस्ट किया है कि जिन आठ सांसदों को निलंबित किया गया है उन्हें वापस बुलाया जाए लेकिन यह हमारा आग्रह है न कि मांग।’

विपक्ष करेगी सत्र का बहिष्कार: नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी

नेता प्रतिपक्ष ने आगे कहा, ‘जब यह विधेयक लाया जा रहा था तब MSP का ऐलान करना चाहिए लेकिन नहीं की गई। खैर MSP बाद में ऐलान किया गया जिसका हम स्वागत करते हैं। MSP को लेकर हमने तीन शर्तें रखी हैं जब तक वो पूरी नहीं हो जाती ये बायकॉट जारी रहेगा।’  गुलाम नबी ने कहा, ‘ जब तक हमारे सांसदों के संस्पेंशन को वापिस नहीं लिया जाता और किसान के बिलों से संबंधित हमारी मांगों को नहीं माना जाता विपक्ष सत्र से बायकॉट करती है।’ राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद गुलाम नबी आजाद ने मंगलवार को कहा, ‘8 सांसदों के निलंबन को वापस लिया जाना चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘पिछले दो दिनों में जो सदन में हुआ मुझे नहीं लगता कि उससे कोई भी खुश है…करोड़ों लोगों का प्रतिनिधित्व करने वालों को करोड़ों लोग देखते हैं। जो लक्ष्य है यहां आने का वो तो पूरा होना चाहिए।’

सभापति ने कहा- विश्लेषण करे विपक्ष

राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने विपक्ष से दोबारा सोचने और विश्लेषण करने का आग्रह किया। उन्हेांने कहा,’सदन के सदस्यों के निलंबन से मैं खुश नहीं हूं। यह कार्रवाई उनके आचरण को लेकर किया गया है।’

सपा सांसद ने कहा- पूरे सत्र का करेंगे बहिष्कार

समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद राम गोपाल यादव ने कहा, ‘मैं वरिष्ठ सांसद हूं, सदन में जो हुआ उसके लिए मैंने माफी मांग ली इसके बावजूद किसी तरह जवाब नहीं मिला। यह काफी अपमानजनक है। मेरी पार्टी ने पूरे सत्र का बहिष्कार करने का फैसला लिया है।

खेद व्यक्त करें तो निलंबन वापस 

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी ने कहा, ‘अगर नंबरों की बात करें तो उस दिन हमारे पक्ष में 110 वोट थे और इनके पक्ष में 72। अगर वो (8 सांसदों द्वारा किया गया अनियंत्रित व्यवहार) इस पर खेद व्यक्त करते हैं तो सरकार इस बात से सहमत है कि उन्हें सदन से बाहर नहीं होना चाहिए।’ पूर्व प्रधानमंत्री व राज्यसभा सांसद एच डी देवेगौड़ा ने कहा, ‘सरकार और विपक्ष दोनों को सदन को चलाने के लिए एकसाथ बैठना चाहिए। सहयोग के साथ लोकतंत्र का कार्य होना चाहिए।’

कृषि विधेयक पर हंगामा

सोमवार को सभापति वेंकैया नायडू ने कृषि विधेयक के विरोध में  हंगामा करने वाले राज्यसभा  के आठ सांसदों को सात दिनों यानि बचे हुए सत्र के लिए सदन की कार्यवाही से निलंबित कर दिया। निलंबन के बाद नाराज सांसद सदन के परिसर में ही धरने पर बैठ गए। रात में कांग्रेस सांसद शशि थरूर धरने पर बैठे सांसदों से मिलने पहुंचे और आज सुबह इन सांसदों के लिए सदन के उपसभापति हरिवंश चाय लेकर पहुंचे।

संसद का मानसून सत्र 14 सितंबर से शुरू हुआ। सत्र के पहले दिन लोक सभा की बैठक सुबह 9 बजे से दोपहर एक बजे तक हुई। इसके बाद से दोपहर तीन बजे से शाम सात बजे तक बैठक हो रही है। इसी तरह राज्य सभा में पहले दिन यानी 14 सितंबर को दोपहर तीन बजे से शाम सात बजे तक बैठक हुई। इसके बाद रोज सुबह नौ बजे से दोपहर एक बजे तक बैठक हो रही है। साथ ही इस सत्र में शनिवार और रविवार को अवकाश नहीं दिया जा रहा है।

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